अज्ञेय नगर में बहुमंजिला प्रोजेक्ट पर ब्रेक!नक्शे में गड़बड़ी और तथ्य छिपाने के आरोप में अनंत रियल्टी की विकास अनुज्ञा रद्द
बिलासपुर के अज्ञेय नगर से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आई है बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट का निर्माण कर रही अनंत रियल्टी को बड़ा झटका लगा है।नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय ने कंपनी को 25 जून 2025 को जारी विकास अनुज्ञा को निरस्त यानी रिवोक कर दिया है।यह कार्रवाई स्वीकृत अभिन्यास में सामने आई गंभीर विसंगतियों, पूर्व स्वीकृत आवासीय भूखंड को रास्ते के तौर पर इस्तेमाल कर नए अभिन्यास में शामिल करने और सारवान तथ्यों के कथित दुर्व्यपदेशन के आधार पर की गई है।
मामला अज्ञेय नगर स्थित खसरा नंबर 15/1, 157/26 और 158/30 की करीब 0.62 एकड़ जमीन पर बन रहे प्रोजेक्ट से जुड़ा है। शिकायतों के बाद मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय समिति गठित की गई थी।जांच समिति ने कंपनी और क्षेत्रीय कार्यालय के जवाबों और दस्तावेजों का परीक्षण किया। सुनवाई के दौरान कंपनी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर भी दिया गया। लेकिन समिति ने कई बिंदुओं पर कंपनी का जवाब संतोषजनक नहीं माना।
पुराने भूखंड को बना दिया रास्ता?
जांच में सामने आया कि जिस जमीन का उपयोग रास्ते के रूप में किया जा रहा था, वह कोई पारंपरिक सार्वजनिक मार्ग नहीं, बल्कि पूर्व स्वीकृत अभिन्यास का आवासीय भूखंड था।समिति के मुताबिक, ऐसे भूखंड को नए अभिन्यास में शामिल करने का प्रावधान नहीं है। यदि पुराने आवासीय भूखंड का सुखाचार के रूप में उपयोग किया जाना था, तो वर्ष 1989 में स्वीकृत पुराने अभिन्यास में विधिसम्मत संशोधन कराया जाना चाहिए था।लेकिन जांच के अनुसार निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
नक्शे में भी मिली गड़बड़ी
मामले में स्वीकृत अभिन्यास के मानचित्र में भी विसंगतियां पाई गईं।कंपनी की ओर से इसे सलाहकार की लिपिकीय यानी क्लेरिकल गलती बताया गया, लेकिन जांच समिति ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।स्वीकृत विकास अनुज्ञा में 15 ब्लॉकों के प्रत्येक ब्लॉक में चार तल और प्रत्येक तल पर एक प्रकोष्ठ के हिसाब से कुल 60 प्रकोष्ठ दर्शाए गए थे। वहीं स्वीकृत अभिन्यास के कुछ हिस्सों में प्रत्येक ब्लॉक में छह तल दर्शाए जाने की बात सामने आई।इस विसंगति का असर सिर्फ प्रकोष्ठों की संख्या पर ही नहीं, बल्कि EWS और LIG प्रकोष्ठों की गणना पर भी पड़ता है।समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिन्यास स्वीकृत होने से पहले आवेदक संस्था के हस्ताक्षर लिए जाते हैं। ऐसे में केवल सलाहकार की लिपिकीय त्रुटि का हवाला देकर संस्था अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती।
शर्तों के उल्लंघन पर भी कार्रवाई
जांच समिति ने विकास अनुज्ञा प्राप्त करने में सारवान तथ्यों के कथित दुर्व्यपदेशन और अनुज्ञा में लगाई गई शर्तों के उल्लंघन को गंभीर माना।क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर ने भी अपनी रिपोर्ट में विकास अनुज्ञा की शर्त क्रमांक 29 और 31 का हवाला देते हुए अनुज्ञा को निरस्त करने की अनुशंसा की।इसके बाद नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 के नियम 25 के तहत 25 जून 2025 को जारी विकास अनुज्ञा क्रमांक 1456 को प्रतिसंहृत यानी रिवोक कर दिया।यानी फिलहाल इस आदेश के साथ अनंत रियल्टी को जारी उक्त विकास अनुज्ञा की वैधानिक स्थिति समाप्त हो गई है।अब बड़ा सवाल यही है कि इस पूरी प्रक्रिया में इतनी गंभीर विसंगतियां आखिर सामने कैसे नहीं आईं और प्रारंभिक स्तर पर विकास अनुज्ञा जारी करने में किस स्तर पर चूक हुई?नगर तथा ग्राम निवेश संचालनालय की इस कार्रवाई के बाद बिल्डिंग और रियल एस्टेट सेक्टर में भी हलचल तेज हो गई है।






