पेंड्रा में जमीन सीमांकन को लेकर परेशान भाजपा पार्षद, एक साल से लगा रहीं अधिकारियों के चक्कर!
बिलासपुर। जमीन की वास्तविक सीमा तय कराने के लिए आम लोगों को राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन जब एक जनप्रतिनिधि ही अपनी जमीन के सीमांकन के लिए लंबे समय से परेशान होने की बात कहें, तो प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। पेंड्रा में जमीन सीमांकन से जुड़ा ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां बिलासपुर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 59 की भाजपा पार्षद सुनीता जगत ने अपनी जमीन पर कब्जे की आशंका जताते हुए प्रशासन से सीमांकन कराने की मांग की है।
पार्षद सुनीता जगत के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2011 में पेंड्रा के बिलासपुर रोड क्षेत्र में रमेश कोल से 16 डिसमिल जमीन खरीदी थी। यह जमीन खसरा नंबर 2480/1 से संबंधित बताई गई है। उनका आरोप है कि जमीन के आगे और पीछे की ओर कब्जे की स्थिति बनने की आशंका है। उन्होंने इकबाल सिंह समेत कुछ अन्य लोगों पर जमीन हड़पने की कोशिश करने का संदेह भी जताया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
एक साल से सीमांकन का इंतजार
सुनीता जगत का कहना है कि वह करीब एक साल से अपनी जमीन का सीमांकन कराने के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर रही हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। जमीन की वास्तविक सीमा स्पष्ट नहीं होने के कारण उन्हें अपनी संपत्ति को लेकर चिंता बनी हुई है।पार्षद का आरोप है कि क्षेत्र में जमीन की कीमत बढ़ने के बाद विवाद की आशंका पैदा हुई है। हालांकि, विवाद के पीछे की वजह और संबंधित लोगों की भूमिका की पुष्टि राजस्व रिकॉर्ड तथा अन्य दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकेगी।
भाजपा पार्षद की परेशानी से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल
इस मामले में राजनीतिक पहलू भी चर्चा का विषय है। छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है और बिलासपुर नगर निगम की भाजपा पार्षद को अपनी निजी जमीन का सीमांकन कराने के लिए लंबे समय से प्रयास करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब एक जनप्रतिनिधि को
ही इस प्रक्रिया में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों को कितनी दिक्कतें होती होंगी?हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि पार्षद का आवेदन किस स्तर पर लंबित है और सीमांकन में देरी की वजह क्या है। संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया भी सामने आना बाकी है।
अब राजस्व विभाग की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल पार्षद सुनीता जगत को अपनी जमीन की वास्तविक सीमा स्पष्ट होने का इंतजार है। अब देखना होगा कि राजस्व विभाग इस मामले में कब और क्या कार्रवाई करता है। नियमानुसार सीमांकन होने से जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है और संबंधित पक्षों के
बीच विवाद की आशंका को दूर करने में मदद मिल सकती है।फिलहाल जमीन पर कब्जे की आशंका और अन्य लोगों पर लगाए गए आरोप पार्षद के दावों पर आधारित हैं। मामले की वास्तविक स्थिति सीमांकन, राजस्व अभिलेखों और संबंधित पक्षों के जवाब सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।



