गांधी जयंती पर केंद्रीय जेल में बंदियों को सत्य और अहिंसा का संदेश विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से कार्यक्रम, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े बंदियों को मिले प्रमाण पत्र

गांधी जयंती पर केंद्रीय जेल में बंदियों को सत्य और अहिंसा का संदेश विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से कार्यक्रम, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े बंदियों को मिले प्रमाण पत्र

बिलासपुर। गांधी जयंती एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर केंद्रीय जेल बिलासपुर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिराजुद्दीन कुरैशी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। इस दौरान “वैष्णव जन तो तेने कहिए” भजन की प्रस्तुति दी गई। केंद्रीय जेल के बंदियों ने “ऐ मालिक तेरे बंदे हम” और “रघुपति राघव राजाराम” जैसे भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों को प्रभावित किया।मुख्य अतिथि शिराजुद्दीन कुरैशी ने बंदियों को संबोधित करते हुए कहा कि जेल में बिताया जाने वाला समय केवल सजा का समय नहीं, बल्कि स्वयं में सकारात्मक बदलाव लाने का अवसर भी हो सकता है। उन्होंने बंदियों से जेल में उपलब्ध शिक्षा, प्रशिक्षण और अन्य अवसरों का सदुपयोग करने, नई चीजें सीखने तथा अनुशासन और अच्छे आचरण के साथ अपने भविष्य को बेहतर बनाने की अपील की।कार्यक्रम में महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, प्रेम, मानवता, स्वच्छता, सद्भाव, नशामुक्ति और सेवा जैसे विचारों पर प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि गांधीजी का जीवन यह संदेश देता है कि सकारात्मक सोच और सही दिशा में प्रयास से व्यक्ति अपने जीवन में बदलाव ला सकता है।इस अवसर पर केंद्रीय जेल में निरुद्ध ऐसे बंदियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जिन्होंने कक्षा 10वीं, 12वीं एवं स्नातक परीक्षाएं उत्तीर्ण की हैं। साथ ही कौशल विकास का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बंदियों को भी प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया।कार्यक्रम में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट असलम खान, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अनिल चौहान, जेल अधीक्षक खोमेश मंडावी सहित न्यायिक अधिकारी, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के अधिवक्तागण, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं जेल स्टाफ मौजूद रहा।कार्यक्रम के समापन पर जेल अधीक्षक ने बंदियों को महात्मा गांधी के आदर्शों पर चलने की शपथ दिलाई। वहीं केंद्रीय जेल बिलासपुर में निरुद्ध दंडित बंदियों को नियमानुसार 10-10 दिवस के अतिरिक्त परिहार (रेमिशन) का लाभ दिए जाने की घोषणा भी की गई।

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