रविवार की छुट्टी में भी इलाज जारी, Apollo Never Sleeps पहल से मरीजों को मिलेगी बड़ी सुविधा
बिलासपुर। अब रविवार का दिन मरीजों के इलाज में रुकावट नहीं बनेगा। अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर ने ‘Apollo Never Sleeps’ पहल के तहत रविवार को भी ओपीडी, हेल्थ चेकअप, डायग्नोस्टिक जांच से लेकर ऑपरेशन तक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं नियमित रूप से जारी रखने का फैसला किया है।लगातार तीसरे रविवार को अस्पताल पूरी क्षमता के साथ संचालित हुआ, जहां बड़ी संख्या में डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ ने मरीजों को उपचार और जांच की सुविधाएं उपलब्ध कराईं।
बिलासपुर प्रेस क्लब के ‘हमर पहुना’ कार्यक्रम में अपोलो हॉस्पिटल बिलासपुर के यूनिट हेड अभय गुप्ता ने कहा कि बीमारी किसी दिन या समय को देखकर नहीं आती। मरीज को अगर रात 12 बजे भी इलाज की जरूरत पड़ती है, तो सिर्फ रविवार होने के कारण उसे अगले दिन तक इंतजार कराना उचित नहीं है। इसी सोच के साथ अस्पताल की
रविवार की पारंपरिक छुट्टी की व्यवस्था में बदलाव किया गया है।अभय गुप्ता के मुताबिक पिछले रविवार को अस्पताल में करीब 10 ऑपरेशन, 12 से 15 हेल्थ चेकअप और 25 से 30 मरीजों की ओपीडी हुई। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में रविवार को भी इलाज की यह व्यवस्था मरीजों के लिए सामान्य सुविधा बन जाएगी।
जरूरतमंद मरीजों के उपचार में सहयोग का भरोसा
अभय गुप्ता ने कहा कि आर्थिक रूप से जरूरतमंद और उपचार के पात्र मरीज अस्पताल प्रबंधन से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने अपने एक पुराने पत्रकार साथी के परिवार से जुड़े हादसे का उदाहरण देते हुए बताया कि दुर्घटना के बाद उनके बेटे के इलाज में व्यक्तिगत स्तर पर भी सहयोग किया गया और बेहतर उपचार के लिए चेन्नई तक व्यवस्था कराने का प्रयास किया गया।
सामाजिक संस्थाओं के साथ बढ़ रही साझेदारी
अपोलो हॉस्पिटल की सामाजिक भागीदारी को लेकर उन्होंने बताया कि अस्पताल अब तक करीब 12 से 15 सामाजिक और सामुदायिक संस्थाओं के साथ एमओयू कर चुका है। इनमें सिंधी सेंट्रल पंचायत, पंजाबी समुदाय, अग्रवाल समाज और राज्य स्तरीय ड्रग एसोसिएशन सहित कई संगठन शामिल हैं। आने वाले समय में इन साझेदारियों को और बढ़ाने की तैयारी है।
600 करोड़ की मशीन से कैंसर का इलाज
अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी देते हुए अभय गुप्ता ने बताया कि निजी क्षेत्र में अपोलो द्वारा प्रोटॉन बीम थेरेपी जैसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराई गई है। चेन्नई स्थित केंद्र में प्रतिदिन करीब 60 से 65 मरीजों का इस तकनीक से उपचार किया जा रहा है।उन्होंने
बताया कि प्रोटॉन बीम थेरेपी मशीन की लागत करीब 600 करोड़ रुपये तक है और इसके उपचार की लागत लगभग 30 लाख रुपये तक हो सकती है। उत्तर छत्तीसगढ़ में भी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
खान-पान और जीवनशैली को लेकर चेताया
स्वास्थ्य जागरूकता पर अभय गुप्ता ने लोगों को आज की जीवनशैली को लेकर भी सावधान किया। उन्होंने कहा कि आज के खान-पान और निष्क्रिय जीवनशैली का असर तुरंत दिखाई नहीं देता, लेकिन उसका असर वर्षों बाद स्वास्थ्य पर सामने आ सकता है।युवाओं में पिज्जा, बर्गर, मोमोज और अत्यधिक तले-भुने भोजन के बढ़ते चलन पर चिंता जताते हुए उन्होंने रोजाना 30 से 45 मिनट शारीरिक गतिविधि करने की सलाह दी। वॉक, योग या जिम के साथ संभव हो तो रोजाना 10 हजार कदम चलने, नमक-चीनी और अत्यधिक तेलयुक्त भोजन कम करने पर भी जोर दिया।उन्होंने लोगों से साल में कम से कम एक बार हेल्थ स्क्रीनिंग कराने की अपील की, क्योंकि कई गंभीर बीमारियां शुरुआती दौर में बिना स्पष्ट लक्षणों के भी मौजूद हो सकती हैं।
‘Apollo Never Sleeps’ पहल का संदेश साफ है—स्वास्थ्य सेवा किसी छुट्टी की मोहताज नहीं, जरूरत पड़ने पर इलाज हर दिन उपलब्ध होना चाहिए।




