घर तोड़ दिए, सड़क की चौड़ीकरण भी हो गई लेकिन पानी का रास्ता बनाना भूल गए! लिंगियाडीह फिर बना तालाब
बिलासपुर का लिंगियाडीह… एक बार फिर सुर्खियों में है। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार विकास नहीं, बल्कि जलभराव चर्चा का विषय बना हुआ है।बारिश होते ही पूरे इलाके में सड़कें तालाब में बदल गईं। हालात ऐसे हो गए कि लोगों के घरों में पानी घुस गया और घरों का सामान पानी में तैरता नजर आया। बर्तन पानी में बहते दिखे, बच्चे और बुजुर्ग घरों में कैद होकर रह गए, जबकि आम लोगों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।कुछ समय पहले इसी लिंगियाडीह में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर लोगों के घर तोड़े गए थे। तब दावा किया गया था कि क्षेत्र का विकास होगा, बेहतर सड़कें बनेंगी और सुविधाएं बढ़ेंगी। लेकिन आज सवाल यह है कि क्या विकास सिर्फ सड़क चौड़ी करने तक ही सीमित था?
“घर तोड़ने की रफ्तार तो दिखी, लेकिन बारिश के पानी की निकासी का इंतजाम करना शायद विकास के नक्शे में था ही नहीं।”
आज हालात यह हैं कि सड़क तो चौड़ी हो गई, लेकिन लोगों की परेशानी भी उतनी ही चौड़ी हो गई। बारिश का पानी सीधे घरों में घुस रहा है और जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।
अब सबसे बड़ा सवाल प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से है—
क्या यही है विकास का मॉडल?जहां लोगों से उनका आशियाना तो ले लिया जाए, लेकिन उन्हें जलभराव से बचाने की बुनियादी व्यवस्था भी न दी जाए।फिलहाल लिंगियाडीह के लोग राहत नहीं, जवाब मांग रहे हैं। क्योंकि उन्हें सड़क से पहले अपने घरों को डूबने से बचाने की जरूरत है।






