जेन-जी शब्द पर रघु ठाकुर की आपत्ति, बोले—विदेशी प्रभाव से तय हो रहे आंदोलनों के एजेंडे
बिलासपुर। जन आंदोलनों की मौजूदा दिशा और उनके उद्देश्यों को लेकर लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के संस्थापक एवं राष्ट्रीय संरक्षक रघु ठाकुर ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बिलासपुर प्रेस क्लब में ‘जन आंदोलन : दशा और दिशा’ विषय पर आयोजित पत्रकार वार्ता में ठाकुर ने ‘जेन-जी’ जैसे विदेशी शब्दों के बढ़ते इस्तेमाल पर आपत्ति जताई।रघु ठाकुर ने कहा कि आज देश में होने वाले कई आंदोलनों पर विदेशी प्रभाव, कॉर्पोरेट ताकतों और पूंजीवादी विचारधारा का असर दिखाई देता है। उनका आरोप है कि कई आंदोलन स्वतःस्फूर्त जनभागीदारी से नहीं, बल्कि किसी तय नैरेटिव और एजेंडे के तहत संचालित होते नजर आ रहे हैं।ठाकुर ने कहा कि आंदोलनों का उद्देश्य केवल सरकार पर तत्काल दबाव बनाना नहीं, बल्कि व्यवस्था में व्यापक बदलाव होना चाहिए। उन्होंने दिल्ली में हुए आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित अभद्र भाषा, गाली-गलौज और तोड़फोड़ पर भी असहमति जताते हुए कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलन में हिंसा और अमर्यादित भाषा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
जन आंदोलन के लिए बताए पांच जरूरी तत्व
रघु ठाकुर के मुताबिक किसी भी वास्तविक जन आंदोलन के लिए पांच बातें जरूरी हैं—आंदोलन स्वतःस्फूर्त हो, जनता के संसाधनों से चले, उसका लक्ष्य व्यवस्था में बदलाव हो, हिंसा से दूर रहे और उसकी भाषा तार्किक एवं लोकतांत्रिक हो।
अन्ना आंदोलन और NEET मामले पर भी सवाल
2010-11 के अन्ना आंदोलन को लेकर भी ठाकुर ने सवाल उठाए। उन्होंने इसे प्रायोजित आंदोलन बताते हुए कहा कि इससे सत्ता परिवर्तन जरूर हुआ, लेकिन व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव नहीं आया।NEET पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या के मुद्दे पर भी उन्होंने राजनीतिक दलों की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि गंभीर मुद्दों पर तत्काल आवाज उठाने के बजाय महीनों बाद आंदोलन करना वास्तविक जनहित के बजाय राजनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
महाराष्ट्र भाषा विवाद पर केंद्र को घेरा
महाराष्ट्र में हिंदी और गैर-मराठी भाषियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को लेकर भी रघु ठाकुर ने चिंता जताई। उन्होंने केंद्र सरकार पर अलग-अलग राज्यों के मामलों में दोहरे रवैये का आरोप लगाते हुए इसे ‘नया भाषाई साम्राज्यवाद’ बताया।प्रेस वार्ता में वरिष्ठ साहित्यकार रामकुमार तिवारी, जावेद उस्मानी सहित रघु ठाकुर के समर्थक मौजूद रहे।





