कल तक दूरी, आज ‘नजदीकी’ की नुमाइश? होटल कारोबारी के बदलते तेवरों पर शहर में चर्चा
बिलासपुर। शहर में जमीन के कारोबार से लेकर होटल व्यवसाय तक पहचान बनाने वाले एक कारोबारी के बदलते तेवर इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। कभी राजनीतिक पहुंच और प्रभाव का हवाला देकर अपना रसूख दिखाने की चर्चा में रहने वाले इस कारोबारी को लेकर अब एक न्यायिक अधिकारी से कथित नजदीकी को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की बातें सामने आ रही हैं।बताया जाता है कि संबंधित न्यायिक अधिकारी जब अधिवक्ता के रूप में बिलासपुर में रहते थे, उस दौरान उनका निवास कारोबारी के घर के सामने स्थित अपार्टमेंट में था। उस समय दोनों के बीच सामान्य परिचय होने की बात कही जाती है। लेकिन अब न्यायिक पद पर पहुंचने के बाद कारोबारी के व्यवहार में कथित बदलाव को लेकर शहर के सामाजिक और कारोबारी हलकों में चर्चा है।चर्चा यह भी है कि एक पार्टी के दौरान कारोबारी संबंधित न्यायिक अधिकारी के साथ हाथ में हाथ डालकर चलते नजर आए। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह महज पुरानी पहचान और दोस्ती थी या फिर अपनी कथित पहुंच और नजदीकी का सार्वजनिक प्रदर्शन?इतना ही नहीं, कारोबारी द्वारा संबंधित न्यायिक अधिकारी को अपना ‘छोटा भाई’ बताए जाने की बातें भी चर्चा में हैं। यहां तक कि न्यायिक अधिकारी द्वारा कारोबारी के पैर छूने जैसे कथित दावों का भी जिक्र किया जा रहा है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि न्यायिक पद की गरिमा और निष्पक्षता को लेकर किसी भी तरह की सार्वजनिक धारणा बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी न्यायिक अधिकारी से निजी परिचय होना अपने आप में कोई अनुचित बात नहीं है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति उस परिचय को अपने प्रभाव या व्यावसायिक हितों के लिए इस्तेमाल करता है, तो यह गंभीर सवाल का विषय बन सकता है।फिलहाल पूरा मामला कारोबारी से जुड़ी चर्चाओं और कथित दावों पर आधारित है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय पूरे मामले की तथ्यात्मक पुष्टि जरूरी है।




