मानसिक बीमारी का इलाज सिर्फ दवा नहीं, भरोसा और काउंसलिंग भी है जरूरी – डॉ. दिलीप दास
बिलासपुर में अपोलो हॉस्पिटल के वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. दिलीप कुमार दास ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मानसिक रोगों के इलाज में केवल दवाइयां ही काफी नहीं होतीं, बल्कि काउंसलिंग, साइकोथेरेपी और मरीज के साथ आत्मीय व्यवहार सबसे अहम भूमिका निभाते हैं।डॉ. दास ने बताया कि पिछले 29 वर्षों में वे चार लाख से अधिक मरीजों को परामर्श दे चुके हैं और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में 350 से ज्यादा निःशुल्क मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता शिविर आयोजित कर चुके हैं। उनकी लिखी पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है, क्योंकि समय पर सही सलाह और उपचार से अधिकांश मानसिक रोगों का सफल इलाज संभव है।डॉ. दिलीप कुमार दास ने कहा कि मनोरोग चिकित्सा में दवाइयों की भूमिका लगभग 25 से 30 प्रतिशत होती है, जबकि 70 प्रतिशत सफलता काउंसलिंग, साइकोथेरेपी और मानवीय व्यवहार पर निर्भर करती है। वे मरीजों को केवल दवाइयां नहीं देते, बल्कि साहित्य, प्रेरक प्रसंग, संतों की वाणी, कविताओं और सकारात्मक संवाद के माध्यम से मानसिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक रोगी के इलाज में ‘ह्यूमन टच’ सबसे महत्वपूर्ण है। डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास, संवेदनशीलता और आत्मीयता का रिश्ता उपचार को प्रभावी बनाता है। यही कारण है कि वे नए मरीज को लगभग एक घंटे का समय देते हैं, जबकि पुराने मरीजों को उनकी आवश्यकता के अनुसार विस्तृत परामर्श प्रदान करते हैं। डॉ. दास ने बताया कि अब तक वे चार लाख से अधिक मरीजों का परामर्श कर चुके हैं। उनका दावा है कि उचित उपचार, काउंसलिंग और मरीज के सहयोग से उनके लगभग 90 प्रतिशत मरीज स्वस्थ होकर सामान्य जीवन जी रहे हैं।






