बृहस्पति बाज़ार विस्थापन पर व्यापारियों का विरोध, शहरभर के व्यापारी उतरे समर्थन में

बृहस्पति बाज़ार विस्थापन पर व्यापारियों का विरोध, शहरभर के व्यापारी उतरे समर्थन मेंनिगम प्रशासन को बताया व्यापार विरोधी, फैसला वापस नहीं लेने पर सड़क पर होगा आंदोलन

बिलासपुर  शहर के सबसे प्रमुख और व्यवस्थित बृहस्पति बाज़ार के प्रस्तावित विस्थापन को लेकर व्यापारी पुरजोर विरोध कर रहे है। निगम के इस फैसले के खिलाफ व्यापारियों में भारी आक्रोश है, और अब यह आंदोलन पूरे शहर के बाजारों का रूप लेता जा रहा है। इस विरोध में अब शनिचरी बाजार, चांटीडीह सब्जी मंडी और तिफरा थोक सब्जी मंडी के व्यापारी संघ भी खुलकर सामने आ गए हैं। सभी संगठनों ने एक स्वर में निगम के फैसले को अव्यावहारिक और व्यापार विरोधी बताया है, जिससे आंदोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है। व्यापारियों का कहना है कि जिस नई जगह का चयन किया गया है, वहां पहुंचना आम नागरिकों के लिए बेहद कठिन है। पर्याप्त सड़क, यातायात और बुनियादी सुविधाओं का अभाव व्यापार और जनजीवन दोनों को प्रभावित करेगा। एक और बड़ा मुद्दा यह है कि गोड़पारा क्षेत्र के निवासी पहले से ही यातायात समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में वहां बृहस्पति बाज़ार का विस्थापन करना स्थिति को और गंभीर बना देगा, जिससे स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। व्यापारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो वे उग्र आंदोलन और बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

पार्किंग सुविधा सबसे बड़ी ताकत

व्यापारियों ने जोर देकर कहा कि पूरे बिलासपुर में बृहस्पति बाज़ार जैसा विशाल और सुव्यवस्थित पार्किंग स्पेस कहीं उपलब्ध नहीं है। वर्तमान स्थान की यह सबसे बड़ी विशेषता है, जबकि नई जगह पर ऐसी कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिख रही है। व्यापारियों ने यह भी मांग रखी है कि विस्थापन से पूर्व नई बिल्डिंग में दुकानों का किराया और शुल्क पारदर्शी रूप से तय किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी व्यापारी को आर्थिक असमंजस या दबाव का सामना न करना पड़े।

निगम पर भरोसे पर सवाल, चाटीडीह का उदाहरण

व्यापारियों ने निगम प्रशासन पर भरोसे को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि निगम पर भरोसा करना तलवार की धार पर चलने जैसा है। वर्ष 2007 में चाटीडीह बाजार को तोड़ा गया था, जिसके बाद थोक व्यापारियों को तिफरा में दुकानें तो दी गईं, लेकिन चिल्हर (खुदरा) सब्जी व्यापारी आज भी अपनी रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस पुराने अनुभव के चलते व्यापारी वर्तमान विस्थापन को लेकर आशंकित हैं।

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