हमर पहुना में पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने साझा किए जीवन के अनछुए पहलू, बोले—पद नहीं, काम है महत्वपूर्ण
बिलासपुर। बिलासपुर प्रेस क्लब के पारंपरिक कार्यक्रम ‘हमर पहुना’ में रविवार, 18 अक्टूबर को पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने अपने जीवन, शिक्षा से जुड़े अनुभवों और राजनीतिक सफर पर खुलकर बातचीत की। राघवेंद्र राव सभा भवन परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने बिलासपुर के विकास, एयरपोर्ट, अरपा नदी, शिक्षा, कोरोना काल में जनसेवा और शहर की बुनियादी समस्याओं पर अपने विचार रखे। इस दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके लिए पद से ज्यादा महत्वपूर्ण काम और जनता के हित हैं।कार्यक्रम में शैलेष पांडेय ने बताया कि राजनीति में आने से पहले उन्होंने करीब दो दशक तक शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में काम किया। डॉ. सी.वी. रमन विश्वविद्यालय और कंप्यूटर शिक्षा से जुड़ी परियोजनाओं में योगदान देते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ के गांवों और स्कूलों तक तकनीकी शिक्षा पहुंचाने के प्रयास किए। उन्होंने ई-गवर्नेंस और भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण से जुड़े ‘भुइयां’ सॉफ्टवेयर का भी उल्लेख किया।अपने राजनीतिक सफर पर चर्चा करते हुए पांडेय ने कहा कि राजनीति में आने की उनकी कोई पूर्व योजना नहीं थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रोत्साहन से उन्हें राजनीति में काम करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में पद से अधिक जिम्मेदारी और जनसेवा का महत्व होता है।
मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर भी रखी अपनी बात
कार्यक्रम में उनसे पूछा गया कि विधायक बनने के बाद कांग्रेस सरकार में उन्हें मंत्री बनाए जाने की उम्मीद क्यों पूरी नहीं हुई। इस पर पांडेय ने कहा कि मंत्रिमंडल का गठन मुख्यमंत्री का अधिकार है। किसी व्यक्ति
के मंत्री बनने या नहीं बनने से बिलासपुर का राजनीतिक महत्व कम नहीं होता। उन्होंने कहा कि बिलासपुर प्रदेश का महत्वपूर्ण शहर है और इसकी पहचान किसी एक व्यक्ति के पद से तय नहीं होती।
एयरपोर्ट, अरपा नदी और शहर के विकास पर जोर
पूर्व विधायक ने बिलासपुर एयरपोर्ट की सुविधाएं बढ़ाने, नाइट लैंडिंग और उड़ानों के विस्तार के लिए किए गए प्रयासों का जिक्र किया। उन्होंने ‘बिलासा देवी केंवटीन एयरपोर्ट’ नामकरण के लिए विधानसभा में संकल्प लाने की अपनी भूमिका भी बताई।अरपा नदी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि नदी बिलासपुर की पहचान और भावनाओं से जुड़ी है। शिवघाट सहित प्रस्तावित बैराज परियोजनाओं का उद्देश्य नदी में पानी बनाए रखने और शहर की जरूरतों को पूरा करने में मदद करना था। उन्होंने कहा कि बिलासपुर के बेहतर भविष्य के लिए नदी संरक्षण, जल निकासी और शहरी बुनियादी ढांचे पर गंभीरता से काम करना जरूरी है।उन्होंने नगर निगम सीमा विस्तार और बिलासपुर को बी-ग्रेड सिटी का दर्जा दिलाने से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की। उनके अनुसार, इन विषयों का सीधा संबंध शहर के विकास और कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं से है।
गरीब बच्चों की शिक्षा और युवाओं को नशे से बचाने की बात
शैलेष पांडेय ने बताया कि विधायक रहते हुए आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किए गए। उन्होंने तिलक नगर, दयालबंद और लाला लाजपत राय क्षेत्र के स्कूलों का उल्लेख करते हुए कहा कि अच्छी शिक्षा प्रत्येक
बच्चे का अधिकार है।वहीं, युवाओं में हुक्का सेवन की समस्या पर उन्होंने विधानसभा में मुद्दा उठाने और संबंधित अधिकारियों के साथ कार्रवाई की पहल करने की बात कही। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए परिवार, प्रशासन और समाज को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
कोरोना काल में जरूरतमंदों की मदद को बताया बड़ी जिम्मेदारी
कोरोना महामारी के दौरान किए गए कार्यों को याद करते हुए पांडेय ने कहा कि लॉकडाउन के समय मजदूरों, ऑटो चालकों, हमालों और अन्य जरूरतमंद लोगों को भोजन और राशन उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। इस दौरान वे स्वयं भी कोरोना संक्रमित हुए। उन्होंने कहा कि संकट के समय लोगों की मदद करना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।कार्यक्रम में उनके व्यक्तिगत जीवन से जुड़ा एक दिलचस्प पहलू भी सामने आया। पांडेय ने बताया कि दूसरी बेटी के जन्म के समय पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उन्होंने खाना बनाना सीखा। आज भी उन्हें आलू-पालक, भरवां बैंगन, आलू-गोभी, भिंडी और खीर जैसे व्यंजन बनाना पसंद है।
बिजली, जलभराव और सोलर सिस्टम पर उठाए सवाल
बिलासपुर की समस्याओं पर चर्चा करते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि शहर में बारिश के दौरान जलभराव और बार-बार बिजली जाने की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें दोबारा जनता की सेवा करने का अवसर मिलता है, तो वे इन समस्याओं के समाधान और शहर के विकास के लिए अधिक संसाधन जुटाने पर जोर देंगे।उन्होंने अपने घर में लगे 10 किलोवाट के सोलर सिस्टम का उदाहरण देते हुए बताया कि इसके बावजूद उनका मासिक बिजली बिल करीब 9 से 10 हजार रुपये आता है। उन्होंने सौर ऊर्जा अपनाने वाले उपभोक्ताओं को उचित लाभ देने और बिजली व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता जताई।
बिलासपुर के लोगों का प्यार जीवनभर याद रहेगा
कार्यक्रम के अंत में शैलेष पांडेय ने कहा कि बिलासपुर की जनता ने उन्हें जो प्यार और समर्थन दिया है, उसे वे जीवनभर नहीं भूलेंगे। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत और हार राजनीति का हिस्सा है, लेकिन जनता के प्रति जिम्मेदारी कभी समाप्त नहीं होती।बिलासपुर प्रेस क्लब अध्यक्ष अजीत मिश्रा, उपाध्यक्ष विजय क्रांति तिवारी सहित वरिष्ठ पत्रकारों और क्लब के सदस्यों की मौजूदगी में आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में पांडेय ने अपने व्यक्तिगत जीवन से लेकर शहर के विकास तक कई मुद्दों पर विचार साझा किए। कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि जनप्रतिनिधि की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि जनता के लिए किए गए कार्यों से होती है।




