कमल भार्गव को अस्पताल ले जा रही 108 एंबुलेंस जाम में फंसी, बिलासपुर की ट्रैफिक व्यवस्था पर उठे सवाल
बिलासपुर। त्योहारों के बीच शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कोनी में हुए सड़क हादसे में घायल कमल भार्गव को अस्पताल पहुंचाने के दौरान 108 एंबुलेंस को जाम के बीच फंसना पड़ा। इस घटना ने आपातकालीन सेवाओं के लिए निर्बाध रास्ता उपलब्ध कराने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।हादसे में घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाना बेहद जरूरी था, लेकिन सड़क पर वाहनों की भीड़ के कारण एंबुलेंस को आगे बढ़ने में परेशानी का सामना करना पड़ा। ऐसे में सवाल उठता है कि जब किसी की जिंदगी बचाने के लिए एंबुलेंस सड़क पर निकलती है, तो उसे
रास्ता दिलाने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?एंबुलेंस का सायरन केवल एक आवाज नहीं, बल्कि किसी की जिंदगी बचाने की पुकार है। इसके बावजूद अगर आपातकालीन वाहन जाम में फंस जाए, तो यह स्थिति यातायात प्रबंधन की तैयारियों पर सवाल खड़े करती है।त्योहारों के दौरान बाजारों और प्रमुख सड़कों पर भीड़ बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे समय में यातायात पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, ट्रैफिक की नियमित निगरानी और एंबुलेंस को तत्काल रास्ता उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।
इस घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बिलासपुर में आपातकालीन वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर जैसी व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है, या जरूरत पड़ने पर उसे जमीन पर भी प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है?
किसी भी शहर की यातायात व्यवस्था की असली परीक्षा उस वक्त होती है, जब किसी की जिंदगी दांव पर लगी हो। जरूरत है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि भविष्य में किसी एंबुलेंस को जाम में फंसकर कीमती समय न गंवाना पड़े।




